आशा कार्यकर्ताओ में निराशा,आखिर कब मिलेगा उनकी मेहनत का पैसा

कैसे होगी लक्ष्य की पूर्ति ,शहरी आशाओं को नहीं मिली प्रोत्साहन राशि महिला बाल विकास एवं स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त बैठक में फजीहत- यलगार टाइम्स हरदा- केंद्र एवं प्रदेश शासन की योजना अनुसार स्वास्थ्य विभाग द्वारा गर्भवती महिलाओं की सुरक्षित प्रसूति कराई जानी है इसके लिए संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने हेतु प्रोत्साहन राशि के आधार पर आशा कार्यकर्ताओं की नियुक्ति की गई है। इसके द्वारा गर्भवती महिलाओं को पंजीयन कराकर समय-समय पर उनके टीके लगवाकर सरकारी अस्पताल में सुरक्षित प्रसूति कराया जाना आवश्यक है इसमें सहयोग करने वाली आशा कार्यकर्ताओं को विभाग की ओर से प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है मगर हरदा शहर के कई इलाकों में कार्यरत आशा कार्यकर्ताओं को यह प्रोत्साहन राशि पिछले 6 माह से न मिलने के कारण वे गर्भवती महिलाओं की साल संभाल करने एवं सुरक्षित प्रसूति कराने में रुचि नहीं दिखा रही है अपना नाम ना बताने की शर्त पर उनका कहना है कि जब हम पूरे समय काम करते हैं तो हमें अपनी प्रोत्साहन राशि मिलने में इतने अड़ंगे क्यों लगते हैं पता चला है कि इन कार्यकर्ताओं ने कुछ दिन पूर्व विभागीय अधिकारियों को लिखित शिकायत की है इधर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सीएमएचओ आर के धुर्वे कहते हैं कि हमने तो सब को भुगतान कर दिया है इस कारण प्रदेश शासन द्वारा महिला एवं बाल विकास विभाग और स्वास्थ्य विभाग की लक्ष्य पूर्ति हेतु हुई संयुक्त बैठक बैठक में अपर कलेक्टर बी आर कोचले के समक्ष विभागीय संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए जबकि इन दोनों विभाग के अधिकारी यह कहते नजर आए कि विभाग के सौ प्रतिशत लक्ष्य को पूरा करना हमारे बस में नहीं है समस्या यह है ,,,,,,,,,,पिछले 6महीनो से शहर हरदा में काम करने वाली कई आशा कार्यकर्ताओं को उनकी प्रोत्साहन राशि ना मिलने से उन्होंने गर्भवती महिलाओं कि साल संभाल करने टीका लगवाने और समय पर संस्थागत प्रसूति कराने में रुचि लेना बंद कर दिया है इस कारण विभागीय रिकॉर्ड में इनका उल्लेख नहीं आ पा रहा है अब यह आशा कार्यकर्ता इन महिलाओं को चाहे वह अमीर वर्ग की हो या गरीब सभी को प्राइवेट नर्सिंग होम भिजवाने में रुचि दिखा रही है इस कारण विभाग के पास जानकारी देरी से आ रही है नतीजन ऐसी बैठकों में इनके अधिकारियों को रिपोर्ट पेश करते समय उच्च अधिकारियों के सामने शर्मिंदा होना पड़ता है । सीडब्ल्यू अधिकारी जवाब नहीं दे पाए- इस बैठक में पूर्व नवागत कलेक्टर अनय द्विवेदी द्वारा टीएल बैठक में जब नए-नए आए अधिकारी ललित डेहरिया से गर्भवती महिलाओं के बारे में जानकारी ली गई तो बे जिले में एक भी ऐसी महिला होने की जानकारी नहीं दे पाए ध्यान रहे कि जिला परियोजना अधिकारी श्री डेहरिया के पास उनके शहर परियोजना कार्यालयों की जानकारी होती तो उन्हें अधिकारी के सामने शर्मिंदा नहीं होना पड़ता यह अलग बात है कि शहर परियोजना अधिकारी श्रीमती कुसुम मदनकार ने यलगार टाइम को बताया कि उनकी परियोजना में 561 महिलाएं हरदा क्षेत्र में गर्भवती हैं इस स्थिति को देखते हुए लगता है कि विभागीय स्तर पर तालमेल ना होने से ऐसी स्थिति निर्मित हो रही है ।इस प्रकार पता चलता है कि दोनों ही विभागों में व्यवस्था पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

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