ग्रामीणों में आक्रोश ,जांच या खानापूर्ति

जनसुनवाई में की शिकायत को अधिकारी नहीं ले रहे गंभीरता से
 15 दिन के पश्चात भी जांच अधूरी

हरदा/दीपगाब कला - जनसुनवाई में जिला कलेक्टर के समक्ष ग्रामीणों के द्वारा जो शिकायत  की गई थी उसकी जाँच होते -होते पुरे 15 दिन होने को है मगर अभी तक अधिकारी कोई निष्कर्ष पर नही पहुंचे हैं ।जिससे की ग्रामीणों को भय है कि कहीं यह मामला भी पूर्व की तरह गेहूं में मिट्टी मिलाएं जाने वाले मामले में जांच में दोषी पाए जाने के बाद भी जिस तरह सम्पूर्ण प्रकरण दब गया है और कोई ठोस कार्यवाही देखने को नही मिली है उसी तरह जाँच के नाम पर यह भी दब के न रह जाए जबकिपूर्व की जाँच में स्पष्ट लिखा है समिति प्रबंधक  दोषी है।

  प्रकरण में दोषी होने के बाद भी अब तक नही हो सकी दोषियों के विरुद्ध ठोस कार्यवाही-
गेहू उपार्जन केंद्र अमासेल पर किसानो से खरीदे गए गेहू में मिटटी मिलाए जाने की जाँच पूर्व के वर्षो में भी अधिकारीयो के द्वारा की गई थी। जिसमे अशोक पारे समिती प्रबंधक के द्वारा पूर्व के वर्षों में भी गेहूं मिट्टी मिलाए जाने के कार्य करने में दोषी बताया गया था और इनके खिलाफ जांच अधिकारी के द्वारा पद से पृथक करते हुए खाद्य अपमिश्रण अधिनियम के तहत कार्यवाही करने हेतु जांच रिपोर्ट में लिखा गया था। परंतु इस मामले में भी अभी तक दोषियों के विरुद्ध कोई ठोस कार्यवाही नहीं होने से ग्रामीणों का विश्वास जिला प्रशासन पर से उठता हुआ दिखाई पड़ रहा है उन्हें आशंका है कि जब पूर्व में दोषी पाए जाने के बाद भी अभी तक उनके विरुद्ध कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है तो इसकी क्या गारंटी के इस जांच में भी इतने किसानो और ग्रामीणों के हस्ताक्षर होने के बाद भी जाँच में दोषी सिद्ध होने के बाद भी  इनके ऊपर कोई कार्यवाही हो।

 शिकायतकर्ताओ ने सलग्न किए है आर.टी.आई. से प्राप्त दस्तावेज---
  ग्रामीणों के अनुसार शिकायत में आर.टी.आई. से प्राप्त दस्तावेज और अखबरों की कटिग भी जनसुनवाई में की गई कलेक्टर को  शिकायत में सलग्न किये गए थे ।लेकिन ग्रामीण बालक दास शर्मा के अनुसार सलग्न पत्र में स्पष्ट जब लिखा है कि यह गेहूं में  मिट्टी मिलाने जाने के कार्य में  दोषी हैं और इनके खिलाफ  कार्रवाई की जाना चाहिए। उसके बाद जांच में आया अधिकारी उस संबंध में किसी भी ग्रामीण से  कोई बात नहीं करना चाहते और वह स्पष्ट रुप से कह रहे हैं  कि यह मामला की जांच मैं अब नहीं कर सकता। जबकि ग्रामीणों का प्रश्न है  कि हमारे द्वारा जांच में  सिद्ध हो जाने वाले दस्तावेज सलग्न किये गए है  तो उसके बाद भी इस विषय पर  जांच करने का तो कोई प्रश्न ही नहीं बनता बस उनका प्रश्न  जिला कलेक्टर  एवं शासन से यह है कि जब जांच में दोषी समिति प्रबंधक पाए गए हैं तो  उनको पद से प्रथक करने की कार्यबाही क्यों नहीं की जा रही है।

जांच अधिकारी की जांच मैं पूछे गए सवालों से संतुष्ट नहीं ग्रामीण---
जांच करने पहुंचे  एस के बर्थ उप अंकेक्षक एवं जांच अधिकारी के सवालों से शिकायतकर्ता संतुष्ट नहीं हुए क्योंकि शिकायत चार बिंदुओं पर की गई थी जिनमें प्रथम बिंदु यह था कि समिति प्रबंधक की संपूर्ण चल अचल संपत्ति की जांच की जाए जिसमें जांच अधिकारी के द्वारा यह तर्क दिया गया कि यह कार्य मेरे अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है वही बिंदु क्रमांक 2 मैं शिकायत की गई थी कि समिति प्रबंधक की पद्धति के समय से लेकर शिकायत दिनांक तक समिति के संपूर्ण रिकॉर्ड की जांच की जाए इस पर भी जांच अधिकारी का जवाब था के संपूर्ण रिकॉर्ड की जांच करवाना संभव नहीं है वही बिंदु क्रमांक 3 में शिकायतकर्ता के द्वारा शिकायत की गई थी कि पूर्व के वर्ष 16 /04/ 2016 मैं उपार्जित केंद्र आमासेल में गेहूं में मिट्टी मिलाए जाने वाले प्रकरण में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होना सुनिश्चित करें जिस पर भी जांच अधिकारी का जवाब था कर यह मामला पूर्व का है और इसकी जांच हो चुकी है वही शिकायत पत्र के बिंदु क्रमांक 4 में समिति प्रबंधक पर लगे गए समस्त आरोपों और शिकायतों की पुनः जांच कराने की मांग की गई थी जिस पर जांच अधिकारी का मत्था के आप कोई मामला बताएं जिसको लेकर हम जांच करें जब भी ग्रामीणों के द्वारा बार-बार कहा ज्यादा रहा कर ऋण माफी और केसीसी में नोटिस गलत तरीके से देने जैसे मामले को लेकर प्रमुखता से जांच की जाए परंतु अधिकारी के द्वारा ध्यान नहीं दिया गया।
 
बलकदास शर्मा पिता शंकर लाल शर्मा ग्रामीण के द्वारा सी एम् हेल्प लाइन पर भी शिकायत की गई है जिसका क्रमाक 4463448 है उनका मानना हा के पूर्व में जिस तरह मामले को दबा दिया गया था कही इस बार भी मामले को दबा नही दिया जाए इस लिए मेने सी एम् हेल्प लाईन पर शिकायत करके मामले की सही जाँच और दोषियों के विरुद्ध कार्यवाही करने की माग की है।

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