अधिकारी के मौखिक आदेश पर की रेत की जप्ती रिकॉर्ड संधारण न होने का बहाना कर नहीं दी जानकारी
mukeshdubeyele@gmail.com लौहपुरुष पेपर हरदा- प्रदेश के एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र में 2 सितंबर को हंडिया तहसीलदार द्वारा चार घंटे की कार्यवाही में रेत के चालीस ढेर जप्त किए जाने का फोटो सहित समाचार प्रकाशित होने के पश्चात शहर के एक आरटीआई एक्टिविस्ट विजय बजाज ने 13 सितंबर को लोक सूचना अधिकारी हंडिया तहसीलदार को आवेदन देकर इससे संबंधित जानकारी मांगी थी। केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा (6)(1) अंतर्गत दिए गए आवेदन में श्री बजाज ने उक्त कार्यवाही करने वाले जांच दल में शामिल अधिकारियों के नाम, नियुक्ति स्थान, जप्ती कार्यवाही दौरान जप्त रेत की कुल मात्रा, बनाए गए पंचनामे, जप्त रेत पंचायतों को सुपुर्द किए जाने दौरान पंचायतों के नाम व सौंपी गई रेत की मात्रा और इससे संबंधित शासन के आदेश/अधिनियम की प्रकाणित छायाप्रति मांगी थी। इसके जवाब में लोक सूचना अधिकारी ने श्री बजाज को 16 अक्टूबर को पत्र क्रमांक 02 सूअअ/ तह/2017 लिखकर बताया कि तत्समय तात्कालिक रूप से मौके पर कार्यवाही की गई थी, जिसके संबंध में कोई रिकॉर्ड संधारण नहीं हुआ है। मात्र मौखिक निर्देशों पर स्थल पर कार्यवाही की गई है। इससे विभागीय अधिकारियों द्वारा संबंधित दिवस मौखिक निर्देश पर कार्यवाही किया जाना स्पष्ट होता है। मगर मौका स्थल पर की गई कार्यवाही का रिकॉर्ड संधारण न होने का हवाला दिया गया है। प्रश्नगत सवालों का बहाना बनाया - आरटीआई स्पेश्लिस्ट विजय बजाज को लिखे पत्र में लोक सूचना अधिकारी जांच दल के अधिकारियों के नाम, नियुक्ति स्थल, जप्ती के पंचनामे की भी जानकारी न देते हुए प्रश्न क्रमांक क्रमांक 4 एवं 5 जिसमें जप्त रेत पंचायतों को रेत संबंधित जानकारी और खनन नीति मे उल्लेखित दस्तावेज या अधिनियम की छायाप्रति जिसमें जप्त रेत पंचायतों को सौंपने का जिक्र हो देने से मना कर दिया। इन्हें प्रश्नगत जानकारी बताते हुए जानकारी नहीं दी गई। लोक सूचना अधिकारी ने सामान्य प्रशासन विभाग के पत्रों का हवाला देते हुए यह कहा कि आवेदक को संबंधित शुल्क जमा कराना होगा। जबकि आवेदक ने अपने मूल आवेदन में औपचारिक रूप से पोस्टल ऑर्डर संलग्र किया है। अधिकारी ने आवेदक को प्रथम अपील में जाने की भी सलाह दी है। क्या है नियम - नियमानुसार आरटीआई में आने वाले आवेदन पर लोक सूचना अधिकारी द्वारा संबंधित जानकारी के दस्तावेजों के आधार पर कितना शुल्क जमा किया जाना आवश्यक है बताना आवश्यक है। यह राशि निर्धारित अवधि में जमा न होने पर आवेदक को जानकारी देने से मना किया जा सकता है। मगर अधिकारी ने संबंधित कार्यवाही को मौखिक आदेश पर किया जाना तो स्वीकार किया किंतु उससे संबंधित कार्यवाही के दस्तावेजों की जानकारी देने हेेतु शुल्क बताने के स्थान पर प्रश्नगत सवाल बताते हुए जानकारी नहीं दी। इसे साथ ही आवेदक को प्रथम अपील में जाने की भी सलाह दे दी है। इससे रुष्ट होकर आवेदक ने प्रथम अपीलीय न्यायालय में जाने का मन बना लिया है। जवाब से उपजे सवाल - लोक सूचना अधिकारी हंडिया तहसीलदार द्वारा दिए गए जवाब से यह तो पता चलता है कि विभाग द्वारा मौखिक आदेश पर कार्यवाही की गई है। मगर जप्ती कार्यवाही में जप्त रेत, अधिकारियों के नाम पंचनामा आदि न मिलने से कई सवाल उत्पन्न होते हैं। कार्यवाही कहां की गई, जप्ती की सामग्री क्या है कितनी है, किसके सुपुर्द की गई आदि का पता न चलने से संपूर्ण कार्यवाही पर कई सवाल उठ खड़े हुए हैं।
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