गरीबी रेखा से नाम कटना बना दिवास्वप्र २० एकड के काश्तकार ले रहे गरीबी का फायदा
हरदा। जिले के हरदा,खिरकिया एवं टिमरनी जनपद पंचायत की पंचायतों के साथ-साथ नगर पंचायत टिमरनी, खिरकिया एवं नगर पालिका हरदा अंतर्गत अमीर गरीब बनकर योजनाओं का लाभ ले रहे है जिसकी जानकारी पटवारी के पास है। भू-अभिलेख में पिता के नाम जमीन दर्ज है और पुत्र गरीब बनकर योजनाओं का लाभ ले रहा है। पंचायतों में अनुसूचित जन जाति के हजारों की तादाद में ऐसे गरीब है जिनके पास जमीन है। अधिकांश तो ऐसे है जिसके पास २० एकड से अधिक जमीन है। ऐसे फर्जी गरीब अधिकारियों की आंख में धूल झोंककर लंबे समय से योजनाओं का लाभ ले रहे है फिर भी उनके खिलाफ कोई कार्यवाही नही की जा रही है। अप्रैल २०१७ में तत्कालीन कलेक्टर ने स्वेच्छा से नाम कटवाने की अवधि निर्धारित की थी किन्तु अवधि बीत गयी फिर भी किसी ने नाम नही कटवाया, जबकि अवधि बीत जाने के बाद कार्यवाही का अल्टीमेटम दिया गया था जिसका गरीबों पर कोई असर नही पडा। आज दिनांक तक अमीर गरीब बनकर योजनाओं का लाभ ले रहे है। फिर जारी हुआ आदेश- जिला कलेक्टर ने फिर से फर्जी गरीबों का नाम काटकर वास्तविक गरीबों का नाम जोडने का एक निर्दश जारी किया है। इसके तहत जितने तादाद में गरीबों के नाम कटेगे उतने ही तादाद में वास्तविक गरीबों का नाम जुड पायेेंगे ऐसा आदेश जारी किया गया है, किन्तु दुर्भाग्य की बात यह है कि जिस कर्मचारी अधिकारी पर फर्जी गरीबो का नाम काटने का दारोमदार टिका है वे कही न कही अपने दायित्वों के निर्वहन में उदासीनता बरत रहे है जिसके कारण उन पर कार्यवाही नही हो पा रही है। जिससे फर्जी गरीब का बेनकाब नही हो पा रहे है। पटवारी के भू-अभिलेख से पता चलेगा फर्जी गरीबों का- जिले के सभी हल्कों के पटवारी के पास भू-अभिलेख है। गरीबी रेखा की सूची पटवारी को देकर फर्जी गरीबों का पता लगाया जाये तो तत्काल इसका पता चल जायेगा और आसानी से गरीबों का नाम सूची से हटाया जा सकता है किन्तु जिला कलेक्टर सहित अन्य जबावदेह अधिकारी इस तरफ ध्यान नही दे रहे है। भू- अभिलेख को आधारकार्ड से जोड दिया गया है। जिसके आधार पर आसानी से फर्जी गरीबो का पता लगाया जा सकता है। जिम्मेदार अधिकारी इस मुद्दे को गंभीरता से लेकर कार्यवाही करने में आनाकानी कर रहे है जिसके कारण गरीबी रेखा से नाम कटना दिवास्वप्र जैसा हो गया है। फर्जी गरीबोका नाम कटना बना चुनौतीपूर्ण कार्य- जिला कलेक्टर के लिए गरीबी रेखा सूची से अमीरो का नाम काटना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। इस चुनौती को स्वीकार कर कार्यवाही करने के नाम पर मात्र औपचारिकता पूरी की जा रही है जिसके कारण कार्यवाही नही हो पा रही है। बार-बार आदेश जारी करके इतिश्री हो लिया जाता है, किन्तु कडाई से कार्यवाही करके गरीबों का नाम काटनें में दिलचस्पी नही दिखायी जा रही है, जो अत्यंत चिंताजनक है। खेडीपुरा, अन्नापुरा में सर्वाधिक फर्जी गरीब- नगर पालिका हरदा अंतर्गत खेडीपुरा और अन्नापुरा में सर्वाधिक गरीब है। सर्वे कराकर कार्यवाही करने में नगर पालिका प्रशासन मूक दर्शक बना हुआ है। मुख्य नगर पालिका अधिकारी इस संबंध मेें सख्त आदेश जारी कर मात्र दो मुहल्लों का सर्वे कराये तो चौकाने वाले आंकडे जगजाहिर हो जायेगे। पार्षद से लेकर पटवारी तक का सहयोग लेकर आसानी से फर्जी गरीबों का पता लगाया जा सकता है।
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