सफाई कामगारों की जान से खिलवाड, सफाई कर्मियों के लिए सम्मान से अधिक जरूरी सफाई उपकरण ,जान जोखिम में डालकर शहर को टाप टेन की सूची में ला रहे सफाई कर्मी ,
हरदा। शहर को टाप टेन की सूची में लाने की कवायद जोर-शोर से चल रही है। इसी कडी में गत दिनों सफाई कामगारों का सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस दौरान उनके स्वास्थ्य पर तनिक भी ध्यान नही दिया गया जबकि सम्मान से ज्यादा जरूरी उनका स्वास्थ्य है। एक कहावत है जान है तो जहान है। जब जान ही नही रहेगी तो सम्मान लेकर क्या करेगे ऐसे ज्वलंत मुद्दे सफाई कामगारो के जेहन में उठ रहे है जो अनुत्तरित है। जनप्रतिनिधि के साथ-साथ जिले के अफसर भी उनके स्वास्थ्य के मुद्दे को गंभीरता से नही ले रहे है जबकि असुरक्षा के कारण एक सफाई कर्मी की बलि चढ चुकी है इसके बाद भी सबक लेकर उनकी सुरक्षा को लेकर प्रशासन संवेदनशाील नही हो रहा है। चोक डेनेज को साफ करने गये सफाई कर्मी की अकाल मौत हो गयी। इस घटना के बाद भी प्रशासन नही जागा। दस्ताना, मास्क,लांग सूज सफाई कर्मियों के लिए बेहद जरूरी है, किन्तु फावडा एवं झाडू देकर सफाई कर्मियों को स्वच्छता की कमान सौप दी जाती है। झाडू लगाते वक्त धूल उडती है जो श्वांस के माध्यम से शरीर के अंदर जाकर दमा जैसी घातक बीमारी को जन्म देती है। कचरे के दुश्प्रभाव से हाथ और पैर को बचाने के लिए दस्ताना और लांग शूज बेहद जरूरी है। इस संबध में मांग भी की गई फिर भी इस तरफ ध्यान नही दिया जा रहा है। सम्मान की औपचारिकता पूरी कर सफाई की कमान तो दे दी गयी किन्तु सुरक्षा मुद्दे को नजरंदाज कर दिया गया। एक बार सम्मान न किया गया होता तो चल जाता किन्तु उन्हे सफाई उपकरण प्रदान कर दिये जाते तो उन्हे ज्यादा खुशी होती। नाम न छापने की शर्त एक सफाई कर्मी ने उक्त व्यथा-कथा लौहपुरूष संवाददाता से व्यक्त किया। उसने दावा किया कि जितने सफाई कर्मी काम कर रहे है उनका स्वास्थ्य परीक्षण करवाया जाये तो चौकाने वाले परिणाम सामने आ जायेगे। दमा एवं चर्म रोगो से पीडित सफाई कर्मियों की तरफ किसी का भी ध्यान नही है। शहर को स्वच्छ नगरों की सूची मे लाने के लिए जी जान से काम कर रहे सफाई कर्मियों के स्वास्थ्य की सुध लेने वाला कोई नही है। मांग के बाद भी लांग शूज, मास्क एवं दस्ताना नही उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि इसमें इतना बजट नही लगेगा कि नगर पालिका भारी आर्थिक बोझ लद जाये। जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों के लिए स्वास्थ्य का मुद्दा भले ही मामूली लगे किन्तुु जो सफाई कर्मी रोजाना इसका सामना कर रहे है उनके लिए तो यह ज्वलंत समस्या है जो कभी भी जानलेवा बन सकता है।
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