फिर छीन गया एक माँ से नबजात बच्चा नवजात की मौत पर अधिकारी झाड़ रहे पल्ला
हरदा- स्थानीय जिला चिकित्सालय से समस्याएं पीछा छोड़ने का नाम नहीं ले रही। यहां चाहे ट्रामा सेंटर की समस्या हो या एसएनसीयू का मामला आये दिन नया सामने आ रहा है। गत बुधवार को चिकित्सकों की लापरवाही से एक नवजात की मौत के मामले में अधिकारी अपना पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं। मामला कुछ यूं है कि खंडवा निवासी रोहिणी जोशी यहां अपने मायके आई थी।एक माह से डॉ रगुबंशी से प्रायबेट इलाज चल रहा था।डॉ द्रारा आश्वासन दिया गया था कि बच्चा ठीक ठाक है और डिलीवरी नॉर्मल होगी। गर्भवती रोहिणी को 5 तारीख बुधवार सुबह 9 बजे भर्ती कराया गया था। इस दौरान दोपहर 12 बजे ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर शिशिर रघुवंशी ने महिला का सीजर ऑपरेशन कर एक नवजात की प्रसुति कराई थी। इस समय शिशु की हालत गंभीर थी ऐसे हालत में एसएनसीयू में डॉक्टर को उसकी जांच कर पता लगाना था कि शिशु की स्वास्थ्य स्थिति कैसी है और उसे क्या उपचार दिया जाना चाहिए। सर्जरी ऑपरेशन के बाद यदि शिशु का स्वास्थ्य सामान्य ना हो और कोई समस्या दिखाई दे तो उसका तत्काल उपचार होना चाहिए। मगर इस बारे में केयर नहीं किया जाने का आरोप लगाया जा रहा है ।इस कारण उसकी मौत हो गई ।यहां भर्ती बच्चों की देखभाल करने वाली नर्स का कहना है कि बच्चे की सांस नली में दूध भरने के कारण उसकी मौत हो गई ।जबकि ऑपरेशन करने वाले चिकित्सक डॉक्टर रघुवंशी अपने बचाव में कहते हैं कि ऑपरेशन के बाद एसएनसीयू के डॉक्टर को यहां रह कर देखभाल कर जांच करनी चाहिए ।उनका साफ कहना है कि हम सर्जन है शिशु रोग विशेषज्ञ नहीं। इसलिए हमारी जिम्मेदारी नहीं बनती है। नियमानुसार ऑपरेशन के समय यहां तैनात डॉक्टर को आना चाहिए। ऑपरेशन के बाद शिशु धात्री को सौंप दिया गया। यहां उस समय डॉक्टर दीपक दुगाया की ड्यूटी बताई जाती है ।मगर उन्होंने भी स्वयं को एसएनसीयू का प्रभारी ना होना बताता पल्ला झाड़ लिया। जबकि प्रभारी डॉक्टर दीपशिखा पाराशर मामले में कोई जवाब नहीं दे रही उन्हें फोन लगाने पर भी रिसीव नहीं किया । नवजात की मौत के बाद उनका पीएम करा कर शव परिजनों को सौंप दिया गया ।मामले में उनके परिजन डॉक्टर रघुवंशी पर लापरबाही बरतने के आरोप लगा रहे हैं। परिजनों का कहना है कि अस्पताल में सीजर ऑपरेशन के समय डॉक्टर को मुंह मांगी फीस देनी पड़ती है हमको भी दो किस्तों में ₹5000 देना पड़ा ।मगर शिशु के उपचार पर खास ध्यान नहीं दिया गया ।यह अलग बात है कि डॉक्टर रघुवंशी ऐसे किसी आरोपों से इनकार करते हैं। मगर बे पूर्ब में भी कई बार ऐसे आरोपों में घिर चुके हैं एक बार तो मामला कलेक्ट्रेट में हुई जनसुनवाई तक जा पहुंचा था। इसमें फरियादी ने आवेदन देकर जिला प्रशासन से जांच कराने की मांग की थी। हाल का मामला अधिक गंभीर होने से जहां डॉक्टर रघुवंशी बुरी तरह फंसे नजर आते हैं वही जिला अस्पताल की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े होते हैं । ऑपरेशन के बाद किसकी जवाबदारी- ऑपरेशन में सर्जरी ऑपरेशन से होने वाली प्रसूति के बाद ऐसे नवजात बच्चों को एसएनसीयू में देखभाल के लिए भर्ती किया जाता है इन बच्चों के स्वास्थ्य एवं इलाज के लिए एक बाल रोग चिकित्सा होता है जिसका मार्गदर्शन में उपचार किया जाता है। इसके साथ एसएनसीयू की तमाम व्यवस्थाएं भी प्रभारी के इंचार्ज में होती है मगर यहां सर्जरी कराने वालों से लेकर शिशु रोग के जानकार चिकित्सक व प्रभारी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे रहे नर्स का कहना भी यह बताता है कि दूध पिलाते समय कोई लापरवाही हुई है इससे लगता है कि अभी जिला चिकित्सालय की व्यवस्थाएं ठीक करने की दिशा में बिशेष प्रयास किये जाने की आवश्यकता है यहां पदस्थ अलमा अपनी ड्यूटी के प्रति मुस्तैद न होने से उपचार कराने वालों की जान में खतरे में पड़ जाती है। अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजनों ने भी लगाया आरोप--- नवजात की मौत का मामला सामने आने के बाद अस्पताल में भर्ती अन्य महिलाएं भी सामने आने लगी उनके परिजनों ने डॉक्टर रघुवंशी पर रुपए लेने का खुलकर आरोप लगाया है। मगरधा निवासी सलमान खान छीपाबड़ निवासी दिनेश चौहान और अजनास निवासी राजेश जाट ने डॉक्टर पर पांच ₹5000 लेने का आरोप लगाया है। वहीं अन्य मरीजों की तरह इनसे भी इंजेक्शन के नाम पर ₹1000 लेने की बात सामने आई है।
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