पुरस्कृत कलेक्ट्रेट में दुर्गंध युक्त को शौचालय बना परेशानी का सबब- कलेक्ट्रेट में चरितार्थ हो रही दिया तले अंधेरे बाली कहाबत

- हरदा-जिला कलेक्टर के नाक के नीचे दुर्गंध युक्त शौचालय कलेक्ट्रेट में लोगों के लिए परेशानी का बरसों से सबब बना हुआ है। जिले के कोने-कोने से आने वाले ग्रामीण शौचालय की दुर्व्यवस्था को देखकर चौकन्ने रह जाते हैं ।गांव में जाकर जो अधिकारी स्वच्छ रहो स्वस्थ रहो की नसीहत देते हैं उंहीं के कार्यालय में दिया तले अंधेरा वाली कहावत चरितार्थ हो रही है शौचालय से इस कदर दुर्गंध आती है कि उसमें जाना तो दूर उधर से गुजरने में नाक पर कपड़ा रखना मजबूरी बन जाता है। साफ सफाई ऐसा लगता है कि महीने भर से भी अच्छे तरीके से एक बार भी नहीं की जाती ।अच्छे तरीके से साफ सफाई कर फिनाइल आदि डाला जाता तो संभवत ऐसी स्थिति निर्मित नहीं होती। कलेक्ट्रेट मध्य प्रदेश का एकमात्र ऐसा कार्यालय है जिस को केंद्र सरकार द्वारा आईएसओ प्रमाण पत्र देकर पुरस्कृत किया गया है ऐसे कार्यालय की इस कमजोरी की तरफ अभी तक किसी का ध्यान नहीं गया। समूचे क्षेत्र में स्वच्छता की अलख जगाई जा रही है और ऐसे माहौल में कलेक्ट्रेट जैसे कार्यालय में स्वच्छता पर अमल न होना अधिकारियों की कथनी करनी में जमीन आसमान का अंतर होने की सोच को जगजाहिर कर रहा है। केंद्र सरकार से जब टीम आने वाली होती है तब कलेक्ट्रेट को रंगरोगन कर चकाचक कर दिया जाता है बाद में उसी पुराने ढंग में आकर व्यवस्था को बदहाल कर दिया जाता है जो अत्यंत चिंतनीय और विचारणीय प्रश्न बन गया है।

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