निशुल्क स्वास्थ्य शिविर का दिया झांसा जांच एवं उपचार की भारी फीस वसूली

मुकेष दुबे, हरदा । शहर में इस बात की भी खूब चर्चा होती है कि अपने बेटे की डिग्री का प्रचार कर डॉ त्रिपाठी यहां बाहर से आने वाले मरीजों की स्वयं जांच कर ऐलोपैथी की उन दवाओं का परचा बनाकर देते हैं जिसके लिए वे अधिकृत नहीं हैं। बाहर से आए मरीजों के परिजन त्रिपाठी नर्सिंग होम संचालकों की इस चाल को समझ नहीं पाए और इसमे ऐसे उलझे कि तमाम छोटी-बडी जांच कराने में उलझते चले गए। हरदा। तमाम कायदे कानूून को धत्ता बताकर चल रहा त्रिपाठी नर्सिंग शासन- प्रशासन के साथ आमजनता की आंखों में धूल झोंकने से पीछे नहीं हट रहा है। प्रताप टॉकीज के पास अपने नए नर्सिंग होम ऽावन का शुऽारंऽा करने पश्चत परचे बंटवाकर एवं मीडिया में खबरें प्रसारित कर आम जनता को निरूशुल्क स्वास्थ्य लगाने का झांसा देकर पूरे एक सप्ताह तक लोगों से जमकर लूट की गई। जब बाहर से यहां इलाज कराने आए लोग पहुंचे तो मरीजों को देखने वाले डॉक्टरों ने हाथ देखकर नाडी समझने का झांसा देकर बीमारी होना बताकर कई जांच कराने की सलाह दी। बाहर से आए मरीजों के परिजन त्रिपाठी नर्सिंग होम संचालकों की इस चाल को समझ नहीं पाए और इसमे ऐसे उलझे कि तमाम छोटी-बडी जांच कराने में उलझते चले गए। यहां लोगों की ऽाड आते देखकर क्लीनिक संचालकों ने शिविर में पंजीयन कराने वाले मरीजों पर दबाव बनाया कि फटाफट यह जांच कराओ अन्यथा आगे बढो हमारे सामने और भी मरीज हैं। इससे लोगों को वहीं जांच कराने को मजबूर होना पडा। जांच के नाम पर लूट - इसके बाद शुरू हुआ लूट का खेल। इसमें खून, खंखार, बलगम, यूरिन, एक्स-रे, हृदय गति नापने जैसी कई जांचों की भारी-भरकम फीस की वसूली की गई। सामान्य सह यह जांचें सौ-पचास रूपए से भी कम में हो जाती हैं। सरकारी अस्पताल में तो यह जांचे फ्री में ही हो जाती है। मगर सुदूर स्थित ग्रामों से आए मरीजों के परिजन पंजीयन कराने के बाद ऐसे फंसे कि उन्हें इससे उबरने का मौका नही मिला। मामूली सी इन जांचों में हजार रूपए से अधिक की धुलाई हो गई। नगर में संचालित अन्य नर्सिंग होम व अस्पताल में इन जांचों पर ज्यादा पैसा खर्च नहीं होता है। केवल जरूरी होने पर ही इसके लिए कहा जाता है। मगर यहां तो रामनाम की लूट का मामला था जो जितना लूटते बना कर लिया गया। जो लुटने को तैयार नहीं थे उनसे कह दिया कि जाओ राम नाम सत्य है। सामान्य रोगियों को किया जबरन भर्ती - यहां जांच करने के नाम पर ही पीडितों से वसूली की गई। बल्कि उन्हें भर्ती कर तीन-चार दिन इलाज कराने की आवश्यकता बतायी। अपने परिजन की गंभीर स्थिति देखकर लोगों के पास इसके अलावा दूसरा चारा नहीं बचा था। बस फिर क्या था इसी के साथ उनसे भरती करने का चार्ज, पलंग किराया, दिनभर की परिचर्या और इस जैसी कई सुविधाओं का पैसा वसूल किया। यहां भर्ती मरीजों के लंबे- चौडे परचे बनाकर महंगी दवाएं लिखकर इस पर मनमाना कमीशन वसूल करने के आरोप लगाए जा रहे है। यहां जांच कराने पहुंचे मरीजों और उनके परिजनों ने बताया कि मामूली बुखार होने के बावजूद इसे गंभीर बताकर अस्पताल में जबरन भर्ती कराया गया। जबकि यही इलाज अन्य क्लीनिक पर बहुत मामूली खर्चे में हो जाते। लोगों का कहना है कि यह निरूशुल्क स्वास्थ्य आयोजित कर लोगों को झांसा देकर अपने नए नर्सिंग होम की लागत वसूल करने की कोशिश में डॉ त्रिपाठी खूब कामयाब हुए हैं। यहां लगा यह शिविर नगर वासियों की चर्चा में बना हुआ है। डिग्री बेटे की, कमाल पिता का - शहर में इस बात की भी खूब चर्चा होती है कि अपने बेटे की डिग्री का प्रचार कर डॉ त्रिपाठी यहां बाहर से आने वाले मरीजों की स्वयं जांच कर होम्योपैथी की उन दवाओं का परचा बना कर देते हैं जिसके लिए वे अधिकृत नहीं हैं। इससे यहां कभी भी उचित-अनुचित इलाज हो जाने से मरीजों की जान जाने का खतरा बना रहता है। यहां एक साल भर पूर्व एक मरीज की जान इसी क्लीनिक में उपचार कराए जाने के दौरान चली गई थी। इस मामले में बुरी तरह फंसे डॉ. त्रिपाठी किसी प्रकार ले-देकर बचे थे। जन सुनवाई बेनतीजा - प्रदेश शासन द्वारा हर मंगलवार को जनसुनवाई शिविर लगाकर लोगों की समस्या हल करायी जाती है। मगर इस नर्सिंग होम में यहां अनियमितता संबंधी शिकायत किए जाने के बाद भी आज तक कोई जांच नहीं करायी गई। नर्सिंग होम से निकलने वाले दूषित कचरे की शिकायत भी बेनतीजा रही। यहां प्रदूषण बोर्ड के अधिकारी जांच के लिए तो आए मगर मामला कहीं रफा-दफा हो गया है। बताते हैं कि अपने राजनीतिक सोर्स का उपयोग करके इस नर्सिंग होम के संचालक अपनी तमाम जांच या तो होने नहीं देते और होती भी है तो जांच रिपोर्ट दबवा लेते हैं। क्या कहते जबाबदार - शहर में त्रिपाठी नर्सिंग होम एवं त्रिपाठी क्लीनिक चल रही है इसकी मुझे जानकारी नहीं है अभी तक इलाज के दौरान कितनी मौतें हुई इसके विषय में भी मुझे कोई जानकारी नहीं है ।

Comments

Share