जिला कलेक्टर के आदेश से क्लीनिक एवं नर्सिगहोम संचालकों में मचा हडकंप
मुकेश दुबे लौहपुरुष पेपर हरदा। जिला मुख्यालय में कुल १०३ क्लीनिक एवं १३ नर्सिग होम संचालित है। जिसके संचालन में जहां एक ओर गाइड लाइन को दरकिनार किया गया है वही दूसरी ओर मरीजो की जान से खिलवाड कर नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है। इसका खुलासा होने पर जिला कलेक्टर अनय द्विवेदी ने एक सप्ताह पहले सभी क्लीनिकों एवं नर्सिग होमो की जांच करने का आदेश सीएचएमओ को दिया। इस आदेश के तहत जांच कार्यवाही शुरू हो गयी है। इससे उन संचालको में हडकंप मच गया जिनके द्वारा नियमो का उल्लंघन करते हुये क्लीनिक एवं नर्सिगहोम काा संचालन किया जा रहा है। -♂जिस गली में आटो नही जा सकते उस गली में क्लीनिको का हो रहा संचालन- शहर में अधिकांश क्लीनिक एवं नर्सिगहोम ऐसे है जो संकरी गली में संचालित है। जहां आटो जाने में दिक्कत होती है। ऐसे स्थान पर क्लीनिक खोलने का परमिशन किस आधार पर दिया गया यह यक्ष प्रश्र बन गया है। ♂स्त्री रोग विशेषज्ञ नही फिर भी हो रहा सीजर आपरेशन- सीजर आपरेशन के लिए आपरेशन थियेटर एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ की आवश्यकता होती है। इसकी परवाह किये बिना क्लीनिको में सीजर आपरेशन हो रहा है। जिसे कोई देखने वाला नही है। गुपचुप तरीके से बाहर एवं सरकारी अस्पताल के डाक्टरो से आपरेशन करवा लिया जाता है किसी को कानोंकान खबर नही हो पाती है। जानकारी के अभाव में मामला उजागर नही हो पाता है। ♂९० फीसदी नर्सिग होमो में एंबुलेंस सुबिधा नही- एंबुलेंस होना अनिवार्य होने के बाद भी ९० फीसदी नसिग होमों एंबुलेंस की सुबिधा नही है फिर भी संचालित है और उनकों संचालन का परमिशन मिला हुआ है। इतना ही नही ड्यूटी डाक्टर नही फिर भी वे धडल्ले से नर्सिग होम का संचालन कर रहे है। ♂बिना टेक्नीशियन के मिली अनुमति- शहर में अधिकांश क्लीनिको में टेक्नीशियन नही है फिर भी चलाने की अनुमति किस आधार पर मिल गयी। यह जांच का विषय बना हुआ है। टीएमटी एवं ईईजी एक्स रे मशीन एवं मशीन संचालित करने के लिए टेक्नीशियन की नियुक्ति अनिवार्य है फिर भी इस तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा है दिव्यांगों के लिए रैंप नहीं बनवाया गया है जबकि रैंप बनवाने के संबंध में आदेश है रेट लिस्ट नहीं लगी है जबकि यह होना अनिवार्य है मरीजों से खुलेआम मनमानी वसूली की जाती है बाहर से डॉक्टर आते हैं और ऑपरेशन करके चले जाते हैं इसकी ना तो अनुमति ली जाती है और ना ही पंजीयन कराया जाता है डॉक्टर की डिग्री सही है या गलत भगवान ही मालिक है जिन डॉक्टरों पर आरोप लगे हैं उनकी जांच करने में कोताही बरती जाती है आरोप लगने के बाद भी उन्हें अभय दान क्यों दे दिया जाता है ।यह विचारणीय प्रश्न बन गया है। खबर लिखने तक सीएमएचओ अधिकारी धुर्वे द्वारा शनिवार को मां रेवा हॉस्पिटल एवं पल्स हॉस्पिटल का निरीक्षण किया गया है।
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