अध्यक्षीय आदेश की पुष्टि में सिमट कर रह गई परिषद की बैठक
हरदा -नगर पालिका परिषद हरदा की बैठक अध्यक्ष के आदेश की पुष्टि में सिमट कर रह गई है। अध्यक्ष बिना पार्षदों के चर्चा के स्व विवेक से आदेश जारी कर देते हैं और बाद में परिषद की बैठक में पुष्टि के लिए प्रस्ताव रख देते हैं। ऐसा पिछले 1 वर्ष से हो रहा है।इसका खुलासा 15 जनवरी 2018 को आयोजित परिषद के साधारण सम्मेलन में हो चुका है। जितने प्रस्ताव थे उनमें से आधे से अधिक आदेश जारी होने के बाद पुष्टि के लिए थे। इससे अध्यक्ष का तानाशाही रवैया उजागर हो रहा है। दलगत राजनीति से ऊपर उठकर श्रीमती दीपाली आदित्य गार्गब,सईद खान (मुन्ना पटेल) ने समस्त पार्षदों को पत्र लिखकर बैठक में प्रस्ताव पर पुष्टि सामूहिक निर्णय से लिया जाए ताकि लोकतंत्र की गरिमा बरकरार रहे ऐसी मांग की है।
1वर्ष बाद भी अध्यक्षीय परिषद का गठन नहीं- नगर परिषद का कार्यकाल 1वर्ष का हो गया है अभी तक प्रेसिडेंट इन काउंसलिंग का गठन नहीं किया गया है। यह विधि सम्मत नहीं है, फिर भी इसका विरोध करने एवं मांग करने की कोई हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। अनेक अनुभवी पार्षद होने के बाद भी उनके तजुर्बे का फायदा नहीं लिया जा रहा है। सारा अधिकार एवं निर्णय अध्यक्ष की मुट्ठी में कैद है यह लोकतांत्रिक एवं मनमानी पूर्ण है।
एक बैठक में 150 प्रस्तावों को पास करने का बना रिकॉर्ड- प्रदेश की संभवत पहली ऐसी नगर पालिका हरदा होगी जिसमें एक बैठक में करीब 150 प्रस्तावों को स्वीकृत चंद समय में दे दी जाती है। कम समय में रिकॉर्ड प्रस्तावों की स्वीकृति पर नजर दौड़ाई जाए तो हरदा नगर पालिका का नाम गिनीज बुक में दर्ज हो सकता है। अब तक हुई सादी बैठकों के पारित प्रस्तावों के आंकड़ों को इकट्ठा किया जाए तो चौंका देने वाला मामला उजागर हो जाएगा।
एजेंडे के प्रस्तावों पर बनी असहमति- 15 जनवरी को परिषद की बैठक में स्वीकृति हेतु जितने एजेंडे शामिल किए गए हैं उसमें असहमति की स्थिति बन गई है। लिखित में प्रोसिडिंग कार्यवाही कर पुनः बैठक में चर्चा के लिए मुद्दे रखे जाएं। नियमों को दरकिनार करते हुए शासन के पैसों को बेफजूल खर्च किया जा रहा है जो अत्यंत चिंताजनक और विचारणीय है। श्रीमती दीपावली आदित्य गार्गब एवं मुन्ना पटेल अन्य पार्षदों द्वारा सारे मामले की उच्चस्तरीय जांच के लिए बरिष्ठ अधिकारियों को लिखित में पत्र भेजा है।
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