संभागीय परियोजना यंत्री ने जिला कलेक्टर को किया गुमराह। झूठी जानकारी देकर ठेकेदार को बचाने की कोशिश।

   मुकेश दुबे  लौहपुरुषपेपर
हरदा- जिले के खिरकिया ब्लाक अंतर्गत शासकीय हाई स्कूल भवन सुंदर पानी के निर्माण में व्यापक स्तर पर गोलमाल किया जाने की शिकायत मंगलवार5 दिसंबर को की गई थी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिला कलेक्टर अनय द्विवेदी ने तत्काल जांच कर कार्यवाही करने का आदेश दिया। जिसके परिपालन में जिला कलेक्टर के आदेश के 20 दिन बाद संभागीय परियोजना यंत्री लोक निर्माण विभाग ने 29 दिसंबर को जांच का प्रतिवेदन जिला कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत किया। जांच रिपोर्ट में दी गई जानकारी में वास्तविकता को छिपाकर संबंधित विभागीय अधिकारी एवं ठेकेदार को बचाने का पूरा प्रयास किया गया। जिला कलेक्टर की आंख में धूल झोंककर जहां उन्हें गुमराह करने की कोशिश की गई वही शासनादेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है। मजदूरों ने दी जानकारी---- संभागीय यंत्री ने जांच रिपोर्ट में पांच दीवाल को तोड़ने की जानकारी दी गई। जबकि मौके पर जाकर मुआवना किया तो मजदूरों ने बताया कि एक दीवार जो मात्र 5 फीट वाली थी उसे तोड़ा गया शेष दिवाले यथावत है। एक मशीन बनी शोपीस-- निर्माण स्थल पर औपचारिकता पूरी करने के लिए बनी प्रयोगशाला में मात्र एक ईंट चेक करने की मशीन लगी है शेष कोई मशीन नहीं है। आश्चर्य की बात यह है कि ईंट चेक करने वाले ऑपरेटर का कहीं अता-पता नहीं, बे कब आते हैं कब जाते हैं और कब परीक्षण करते हैं उसका भगवान ही मालिक है। सीमेंट मसाला भी चेक होने की जो जानकारी दी गई वह वास्तविकता से परे है। खोखली चौखटे--- खिड़की दरवाजो कि चौखट की गुणवत्ता की परख की गई तो पता चला कि वह खोखली है उसको ठोकने पर आवाज आती है। मजबूती के लिए बीच में भरा जाने वाला मसाला नहीं भरा गया। मंगलवार को जनसुनवाई में शिकायत के बाद बोर्ड लगवाया गया। जबकि सन 2016 में निर्माण कार्य का बोर्ड लगवाने की गलत जानकारी दी गई। न्यूज़ चैनल IND 24 एवं दैनिक यलगार टाइम्स की टीम ने शुक्रवार 30 जनवरी 2017 को जब मौके पर जाकर वस्तुस्थिति को देखा तो असलियत सामने आ गई । निर्माण कार्य में लगे बाल मजदूर --- 14 वर्ष तक के बच्चों से काम करवाना अपराध की श्रेणी में आता है किंतु टीम को वहां पर बाल मजदूर काम करते हुए शुक्रवार 30 जनवरी को पाए गए। इससे पता चलता है कि जो निर्माण कार्य हो रहा है उसे कोई देखने और सुनने वाला नहीं है। शिकायत के बाद झूठी जांच रिपोर्ट देकर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है जो अत्यंत चिंताजनक है। संभागीय परियोजना यंत्री का जवाब--- निर्माण काल में व्यापक खामियों के संबंध में विभाग के आला अफसर से बात की गई उन्हें निरीक्षण के दौरान सभी वीडियो और फोटोग्राफ दिखाए गए तो उन्होंने सारे आरोपों को एक सिरे से खारिज करते हुए कहा कि अधिकारी निरीक्षण के लिए जाते हैं। वहां कोई खामियां नहीं है प्रयोगशाला में सभी मशीने उपकरण है ।इस संबंध में न्यूज़ चैलन आईएनडी 24 अतुल मालवीय ने अधिकारी से वाइट देने का कहा तो उन्होंने बाइट देने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि भोपाल से हमें आला अधिकारियों ने वाइट देने का मना किया है। उनके इस रवैया से जाहिर होता है कि घटिया निर्माण कार्य में उनकी भूमिका भी संदिग्ध है।

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