जिला कलेक्टर के आदेश के बाद टूटी सीएमएचओ की तंद्रा।

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हरदा- जिला मुख्यालय में नर्सिंग होम एवं क्लीनिकों की बाढ़ आ गई है। थोक में हर गली मोहल्ले में नर्सिंग होम क्लिनिक बेरोकटोक संचालित हो रहे हैं। बरसों पहले आंख बंद करके तत्कालीन सीएमएचओ ने सभी को परमिशन दे दी उस समय मापदंडों पर तनिक भी ध्यान नहीं दिया गया। जब जिला कलेक्टर अनय द्विवेदी ने मापदंडों के विपरीत चल रहे नर्सिंग होम का पता लगाने का आदेश दिया तब वर्तमान सीएमएचओ श्री धुर्वे की तंद्रा टूटी। इसके पहले उन्होंने ध्यान क्यों नहीं दिया यह जांच का गंभीर विषय बन गया है। 

                     चिकित्सा सुविधा को बेहतर बनाना उनकी जवाबदारी है जिसको निभाने में कहीं ना कहीं चूक की गई जिसका खामियाजा बेगुनाहों मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। एंबुलेंस जैसी अनिवार्य सेवा के अभाव में अब तक ना जाने कितने मरीजों की मौत हो चुकी होगी नियम विरुद्ध नर्सिंग होम के संचालन को दी गई मंजूरी जांच का गंभीर विषय बन गया है। क्या उस वक्त के तत्कालीन सीएमएचओ पर कार्यवाही की जाएगी क्योंकि उन्हीं के द्वारा नियमों को दरकिनार करते हुए थोक में नर्सिंग होम के संचालक को मंजूरी दे दी गई।

       सबसे आश्चर्य की बात यह है कि इस अंधेरगर्दी बरसों से मची है। जिला कलेक्टर के आदेश के बाद स्वास्थ्य विभाग का अमला जागा और तमाम कमियां दिखने लगी।इसके पीछे कारण चाहे जो हो इसको लेकर लोगो मे तरह तरह की चर्चा का बाजार गर्म है।कोई न कोई कारण अवश्य है जिसके चलते जानकारी के बाद भी अब तक आँख पर पट्टी बांधे गांधारी की भूमिका का निर्वहन किए। फल स्वरुप ऐसी परिस्थितियां बन गई है जहां मरीज असमय काल के मुंह में समा रहे हैं वही शासन के निर्देशों का चौतरफा मौखोल उड़ रहा है।


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