एससी एसटी एक्ट से भाजपा का चुनावी समीकरण बदलने के आसार। बहुत कठिन है डगर पनघट की।

मुकेश दुबे 9826036011
हरदा एसटी-एससी एक्ट में संशोधन को लेकर जहां एक ओर सवर्णों का विरोध स्वर् तेजी से उभर रहा है। वहीं दूसरी ओर धिक्कार रैली एवं काले झंडे किसान कांग्रेस दिखाकर किसान, मजदूर विरोधी नीतियों का विरोध कर रही है। अभी हाल में सीधी में पत्थरबाजी, काले झंडे दिखाने को लेकर जो स्थिति बन रही हैं उसके मद्देनजर भाजपा की राह आसान नजर नहीं आ रही है।
* सपाक्स ने एससी एसटी एक्ट के विरोध में 6 सितंबर को भारत बंद का आह्वान किया है। पूरे देश में जोर शोर से विरोध हो रहा है वोट की राजनीति के चलते सवर्णों के हक, क्षेत्र, अधिकार पर जो कुंठा धार किया जा रहा है वह अत्यंत चिंताजनक एवं विचारणीय पहलू बन गया है। भाजपा का असली चेहरा बेनकाब हो रहा है।
* राम मंदिर बनवाने का दावा कर सत्ता में आने वाली भाजपा अपने एजेंडे को भूलती जा रही है। जब चुनाव फिर आता है तब चुनावी एजेंडा उसे याद आता है। कथनी-करनी के अंतर को लेकर किसान, मजदूर, सवर्ण वर्ग बेहद त्रस्त हैं।
*बुद्धिजीवियों, गणमान्य नागरिकों द्वारा वोट की राजनीति से त्रस्त होकर नोटा की बटन दबाने का निर्णय लिया हैं। देश के इतिहास में संभवत ऐसा पहला मौका होगा जब चुनाव में सर्वाधिक नोटा के वोट होंगे। जनता जनार्दन की नब्ज टटोलने में जो स्थिति परिलक्षित हो रही है उस के मद्देनजर नोटा का सर्वाधिक उपयोग संवैधानिक संकट उत्पन्न कर सकता है। ऐसे हालत प्रदेश में ही नहीं बल्कि पूरे देश में बन रहे हैं। एसटी-एससी एक्ट से भाजपा का चुनावी गणित फेल होता नजर आ रहा है। केंद्र एवं प्रदेश की भाजपा सरकार ने समय रहते रवैया में बदलाव नहीं किया तो सिवाय पछतावे के कुछ भी हाथ नहीं लगेगा। भाजपा के चुनाव की डगर बहुत कठिन नजर आ रही है।


Comments

Share