आदिवासी बच्चों में शिक्षा की अलख जगाने का उल्लेखनीय प्रयास।

मुकेश दुबे
हरदा। जिले के अंतिम छोर पर स्थित शासकीय प्राथमिक शाला डोमरिकला के प्रधान पाठक राघवेंद्र पारे ने शिक्षा में उल्लेखनीय प्रयास किया है।आदिवासी क्षेत्र के बालकों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ कर उनमें शिक्षा की अलख जगाई। उनके भविष्य को सजाया संवारा और आज वह उच्च शिक्षा हासिल कर अपने भविष्य को उज्जवल बनाने की ओर अग्रसर है। आठवीं कक्षा के बाद छात्र छात्राएं पढ़ाई छोड़ देते थे। श्री पारे ने सोनतलाई हायर सेकेंडरी में प्रवेश फीस देकर करीब 1 दर्जन से अधिक बच्चों को पढ़ाई नहीं छोड़ने दिया। इनके अलावा 50 बच्चों को ठंड के दिनों में स्वेटर देकर पीड़ित मानवता की सेवा की मिसाल पेश की।
             शाला परिसर का वातावरण इतना आकर्षक और मनमोहक बनाया की जिले में यह स्कूल आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। अन्य स्कूलों के शिक्षक एवं बच्चे स्कूल देखने एवं दीवारों की साज सज्जा, प्रेरणा देने वाले वाक्य, चित्र, चार्ट देखने आते हैं। जिले की एकमात्र ऐसी स्कूल है जिसमें शाला का बेहतर तरीके से संचालक किया जा रहा है। बच्चों की पढ़ाई बेहतर ढंग से होने का परिणाम है कि एक छात्र को इंस्पायर अवार्ड में राष्ट्रीय प्रदर्शनी दिलाने में जाने का अवसर मिला।
          महापुरुषों की जयंती, पुण्यतिथि के आयोजन के साथ-साथ नवाचार बच्चों को पढ़ाते हैं। खेल खेल में शिक्षा देकर बच्चों एवं अभिभावकों के बीच अपनी एक अस्मरणीय पहचान बनाए हैं। क्षेत्रीय विधायक डॉ रामकिशोर दोगने, पुनासा विधायक लोकेंद्र सिंह शाला का अवलोकन करके ना केवला तारीफ की अपितु डॉ दोगने ने प्रशस्ति पत्र भेंट कर उनका सम्मान किया है। शाला परिषद इतना भव्य एवं आकर्षक है जो भी देखता है वह आकर्षित हो जाता है शाला परिसर में नाना प्रकार के फूल के पौधे लगे हैं। जो शाला की सुंदरता चार चांद लगा देते हैं।




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