जिले के दोनों विधानसभा क्षेत्रों में गुटबाजी चरम सीमा पर। दो की लड़ाई में तीसरे को मिल सकता है फायदा।
हरदा। इस बार का विधानसभा चुनाव काफी दिलचस्प नजर आ रहा है। गुटबाजी, मनमुटाव, भीतरघात चरम सीमा पर है। टिकट के दावेदार अब बगावत पर उतर आए हैं। कुछ खुलकर सामने आ रहे हैं और कुछ अंदर ही अंदर सेंध लगाकर प्रत्याशी को नुकसान पहुंचाने के लिए एड़ी चोटी का प्रयास कर रहे हैं। इस प्रयास में उन्हें कितनी सफलता मिलेगी यह तो भविष्य के गर्त में है बहरहाल प्रत्याशी ऐसी स्थिति से निपटने के लिए समय रहते कोई ठोस रणनीति बनाकर उस पर काबू पाने की दिशा में कोई पहल नहीं करेंगे तो निश्चित रूप से इसका फायदा कोई दूसरे पार्टी ले सकता है जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर रहा है। दो की लड़ाई में फायदा तीसरे को मिल जाता है ऐसी स्थिति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
**जिले में हरदा टिमरनी दो विधानसभा क्षेत्र हैं। दोनों क्षेत्रों में नामांकन दाखिल करने के बाद जोड़-तोड़ की राजनीति ने जोर पकड़ लिया है । शह और मात का खेल खेल रहे हैं। हम किसी से कम नहीं की तर्ज पर प्रत्याशी ताल ठोक कर चुनाव मैदान में कूद गए हैं और चुनावी गणित एवं समीकरण बनाकर जीत का दावा भी कर रहे हैं। बगाबत और गुटबाजी का लाभ लेने की फिराक में कई प्रत्याशी हैं और इसके लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे है। प्रमुख दलों के प्रत्याशी इस मुगालते में है कि चुनाव जीते हुए हैं। किंतु दोनों विधानसभा क्षेत्रों में जो चुनावी समीकरण उभर कर सामने आ रहा है उससे मतदाताओं का रुझान किस करवट बैठेगा इस बारे में कुछ भी कहना मुश्किल है। हालांकि ऊपर तो सब कुछ सामान्य दिख रहा है किंतु अंदरूनी माहौल कुछ और ही देखने व सुनने को मिल रहा है गुटबाजी चरम सीमा पर है जिससे प्रत्याशी नजरअंदाज कर रहे हैं जो चुनावी समीकरण बन रहा है। उससे विधानसभा चुनाव काफी दिलचस्प एवं रोचक बन गया है
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