चुनाव प्रचार में दिख रहा दिलचस्प नजारा। चौतरफा बन रही हास्यास्पद स्थिति।
मुकेश दुबे 9826036011
हरदा। विधानसभा चुनाव 2018 के चुनाव प्रचार में कुछ दिलचस्प नजारा देखने व सुनने को मिल रहा है। जिससे जहां एक ओर चौतरफा हास्यास्पद स्थिति बन रही है वहीं दूसरी ओर जनता जनार्दन भी पशोपेश में है। बिना मुद्दा के चुनाव प्रचार किया जा रहा है। जनहित के ज्वलंत मुद्दों की अनदेखी करते हुए जनता जनार्दन से मतदान की अपील की जा रही है।
*सवर्णो की अनदेखी* चुनाव प्रचार में सवर्णो की अनदेखी की जा रही है। हक एवं हित के मुद्दे को नजरअंदाज किया जा रहा है ।प्रत्याशियों एवं उनके कार्यकर्ताओं द्वारा इस मुद्दे की अनदेखी की जा रही। स्थिति को स्पष्ट नहीं किया जा रहा। जायज हक एवं अधिकार की बात नहीं की जा रही।
* जनसंपर्क में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे कार्यकर्ता* इस बार के चुनाव में विभिन्न दलों के कार्यकर्ता चुनाव प्रचार के लिए जनसंपर्क करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है ।चुनाव के लिए एक पखवाड़े का समय शेष है। जन संपर्क एवं चुनाव प्रसार जिस तरह से करना चाहिए उस तरह से हरदा एवं टिमरनी दोनों विधानसभा क्षेत्रों में देखने और सुनने को नहीं मिल रहा।
* जातिगत समीकरण का बोलबाला * इस चुनाव में जातिगत समीकरण हावी दिख रहा है। सभी प्रत्याशी इसी समीकरण के आधार पर न केवल जीत का दावा कर रहे हैं अपितु जनसंपर्क कर चुनाव प्रचार कर रहे हैं। जातिगत समीकरण चुनावी माहौल को बिगाड़ सकता है इसके आसार बन रहे हैं जिसे कतई इंकार नहीं किया जा सकता।
* मतदाताओं का नब्ज टटोलना हुआ मुश्किल* मतदाता जागरूक हो गए हैं उनकी नब्ज टटोलना बहुत मुश्किल है। सभी को मतदाता आश्वासन देकर अपना पीछा छुड़ा रहे हैं दोनों विधानसभा क्षेत्रों में यही माहौल बन रहा है। पिछले कई विधानसभा चुनाव के आश्वासनों के बाद विद्यमान समस्याओं का सामना कर रहे मतदाताओं में असंतोष का माहौल में अभिव्यक्त नहीं कर रहे हैं किंतु सभी को समर्थन देने की बात कह कर मतदाता खुलकर विरोध नहीं जता रहे। * दमदार कार्यकर्ताओं का पार्टी छोड़ना* ऐन मौके पर दमदार कार्यकर्ताओं का पार्टी छोड़ना खतरे का संकेत दे रहा है। इससे जाहिर हो रहा है कि पार्टी की रीतियो नीतियों से जन कार्यकर्ता ही संतुष्ट नहीं है तो आम जनता से संतुष्टि की उम्मीद करना बेमानी होगी ।बगावत, गुटबाजी, मनमुटाव, दूर करने के कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। जिससे चुनावी माहौल कौन से करवट लेगा इस बारे में कयास लगाना मुश्किल हो रहा है। *प्रत्याशियों से वाकिफ* जिले के दोनों विधानसभा क्षेत्रों की जनता प्रत्याशियों से भलीभांति वाकिफ है। उनके विकास कार्यों को देख सुन चुकी है। जनता सब कुछ जानती समझती है और जागरूक भी हो चुकी है। ऐसी स्थिति में जनता जनार्दन को लुभाना बहुत कठिन है। पिछले एक दशक से अधिक समय से बेरोजगारी, गंजाल मोरल परियोजना, ट्रामा सेंटर,जिले में महाविद्यालायो की कमी आदि समस्याओं से जूझ रहे हैं। आश्वासन घोषणा, दावा, वायदा तो बहुत किया गया किंतु उसका फायदा आज तक नहीं मिल पाया जिससे जनता में असंतोष का माहौल स्पष्ट दिख रहा है।
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