मां नर्मदा को छलनी करने वाले भुगत रहे सजा। ईश्वर के घर देर है पर अंधेर नहीं।
हरदा। रेत का उत्खनन एवं परिवहन कर मां नर्मदा की कोख छलनी करने वालों को अधिकारी भले ही माफ कर दे रहे हैं। किंतु मां नर्मदा उन्हें कभी भी माफ नहीं करेगी। ऐसे ठेकेदारों,अफसर किसी ना किसी रूप में सजा भुगत रहे हैं। कहते हैं कि ईश्वर के घर देर जरूर है अंधेर नहीं। वर्तमान में अवैध उत्खनन से मां नर्मदा का परिदृश्य हो गया है जगह जगह जहां एक ओर जानलेवा गड्ढे बन गए वहीं दूसरी ओर गर्मी के दिनों में मां नर्मदा की अविरल बहने वाली धारा थम जाती है। *भक्तों की आस्था को गहरा आघात* मां नर्मदा के अस्तित्व पर मंडराये संकट के बादल से भक्तों की आस्था को गहरा झटका लग रहा है। अवैध उत्खनन में लगे माफिया को मां नर्मदा के साथ साथ भक्तों की तरफ से भी बद्दुआ मिल रही है। यही वजह है कि रेत माफियाओं के दिन खराब आ गए हैं। सब उल्टा हो रहा है ।जो सोचते हैं उसके ठीक विपरीत हो रहा है। परिवार में कोई ना कोई बीमार पड़ा रहता है। किए का फल उन्हें मिल रहा है। फिर भी उनकी आंख नहीं खुल रही। मुंह में राम बगल में छुरी की तर्ज पर मां नर्मदा के उत्खनन रोकने का एक तरफ अलाप रहे हैं वहीं दूसरी ओर गुपचुप तरीके से उत्खनन कर रहे हैं। और अन्य को संरक्षण प्रदान कर रहे हैं। छीपानेर से हंडिया तक मां नर्मदा की स्थिति बेहद खराब और चिंतनीय है। * नर्मदा सेवा यात्रा का नहीं पूरा हुआ संकल्प * मां नर्मदा को रेत उत्खनन और प्रदूषण से मुक्त कराने के लिए नर्मदा सेवा यात्रा शुरू की गई। करोड़ों रुपए खर्च कर तमाम संकल्प लिए गए। उत्खनन प्रदूषण रोकने की बात तो दूर की रही। लिए गए संकल्प को ही भूल गए। जबकि मां नर्मदा के समक्ष लिए गए संकल्प को पूरा नहीं करने पर जघन्य पाप लगता है। जिसका प्रायश्चित किसी भी कीमत पर संभव नहीं है। मां नर्मदा के साथ छलावा जनप्रतिनिधि अफसर ठेकेदार सभी कर रहे हैं। कहते हैं कि ईश्वर की लाठी में इतना जोर होता है कि किसी को पता भी नहीं चलता और वार हो जाता है। जो जो उत्खनन और परिवहन कर रहे हैं या फिर संरक्षण प्रदान कर रहे हैं। उनका बड़ा बुरा हाल है।* नर्मदा पुराण में इसका उल्लेख है कि मां नर्मदा उन्हें कभी भी क्षमा नहीं करेगी। उन्हें इस गलती का खामियाजा भुगतना ही पड़ेगा। धार्मिक अनुष्ठान कराने का कितना ही ढोंग, स्वांग कर ले किंतु मां नर्मदा उन्हें कतई अभयदान नहीं दे सकती है।
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